एफएमसी कोराजेन एक ब्रॉड-स्पेक्ट्रम कीटनाशक है जो स्टेम बोरर, लीफ फोल्डर, गॉल मिज और दूसरे कीड़ों को खत्म करता है। कोराजेन कीटनाशक दोहरे तरीके से काम करता है — सिस्टेमिक और कॉन्टैक्ट दोनों मोड से। यह दवा रायनोडीन रिसेप्टर पर असर करती है, जिससे कीड़ों की मांसपेशियों में बेकाबू सिकुड़न होती है। इसके बाद कीड़े तुरंत खाना बंद कर देते हैं, लकवा मार जाता है और कीड़े मर जाते हैं। कोराजेन कीटनाशक ब्रॉड-स्पेक्ट्रम है और लंबे समय तक सुरक्षा देता है। इसलिए यह काफी किफायती है और पर्यावरण पर इसका केमिकल असर भी कम होता है।
कोराजेन कीटनाशक की खास बातें और फायदे:
बेहद असरदार: कोराजेन कीटनाशक की किसी भी पुराने कीटनाशक से क्रॉस-रेजिस्टेंस नहीं है, इसलिए यह असरदार सुरक्षा देता है।
तेज़ असर: यह एफएमसी कीटनाशक कीड़ों का खाना लगभग तुरंत बंद कर देता है। इससे फसल सेहतमंद रहती है और पैदावार बेहतर होती है।
मजबूत सिस्टेमिक असर: कोराजेन कीटनाशक में मजबूत सिस्टेमिक मोड ऑफ एक्शन है और ट्रांसलैमिनर एक्टिविटी है, जो पूरी फसल को कवर करती है।
लंबे समय तक असर: कोराजेन कीटनाशक का एक बार इस्तेमाल करने पर लंबे समय तक असर रहता है। इससे बार-बार छिड़काव की जरूरत नहीं पड़ती।
बारिश में भी टिकाऊ: कोराजेन कीटनाशक छिड़काव के कुछ समय बाद बारिश से आसानी से धुलता नहीं है।
ब्रॉड-स्पेक्ट्रम सुरक्षा: यह कीटनाशक स्टेम बोरर, लीफ फोल्डर और कई दूसरे कीड़ों से ब्रॉड-स्पेक्ट्रम सुरक्षा देता है।
कोराजेन कीटनाशक के उपयोग — यह किन कीड़ों को कंट्रोल करता है?
बोरर: येलो स्टेम बोरर (धान), अर्ली शूट बोरर और टॉप बोरर (गन्ना), स्पॉटेड बोरर और पिंक बोरर (कपास), शूट और फ्रूट बोरर (बैंगन, मिर्च)
बॉलवर्म: अमेरिकन बॉलवर्म, पिंक बॉलवर्म — कपास
कैटरपिलर: आर्मीवर्म, टोबैको कैटरपिलर (स्पोडोप्टेरा लिटुरा), फॉल आर्मीवर्म (मक्का)
पत्ता खाने वाले कीड़े: लीफ फोल्डर (धान), डायमंडबैक मॉथ (पत्तागोभी), पत्ता खाने वाले कैटरपिलर
फली और फल के कीड़े: पॉड बोरर (चना, अरहर), फ्रूट बोरर (टमाटर, मिर्च), गॉल मिज
कोराजेन कीटनाशक की मात्रा — फसल के हिसाब से बताई गई खुराक:
कोराजेन कीटनाशक को प्रति एकड़ 200 लीटर साफ पानी में मिलाकर पत्तों पर छिड़काव करें। कीड़ों की पहली निशानी दिखते ही या टारगेट कीट के इकोनॉमिक थ्रेशोल्ड लेवल पर छिड़काव करें।
फसल | टारगेट कीट | मात्रा प्रति एकड़ | प्रति 15 लीटर पंप | PHI |
धान | येलो स्टेम बोरर, लीफ फोल्डर, गॉल मिज | 60–75 मि.ली. | 4.5–5.5 मि.ली. | 14 दिन |
गन्ना | अर्ली शूट बोरर, टॉप बोरर | 75–100 मि.ली. | 5.5–7.5 मि.ली. | 30 दिन |
कपास | बॉलवर्म, स्पॉटेड बोरर, पिंक बोरर | 60–75 मि.ली. | 4.5–5.5 मि.ली. | 14 दिन |
टमाटर | फ्रूट बोरर | 60 मि.ली. | 4.5 मि.ली. | 3 दिन |
मिर्च | फ्रूट बोरर | 60 मि.ली. | 4.5 मि.ली. | 3 दिन |
बैंगन | शूट और फ्रूट बोरर | 60 मि.ली. | 4.5 मि.ली. | 3 दिन |
पत्तागोभी | डायमंडबैक मॉथ | 60 मि.ली. | 4.5 मि.ली. | 3 दिन |
सोयाबीन | पॉड बोरर, आर्मीवर्म | 60–75 मि.ली. | 4.5–5.5 मि.ली. | 14 दिन |
मक्का | फॉल आर्मीवर्म, स्टेम बोरर | 75–100 मि.ली. | 5.5–7.5 मि.ली. | 14 दिन |
मूंगफली | स्पोडोप्टेरा, लीफ कैटरपिलर | 60–75 मि.ली. | 4.5–5.5 मि.ली. | 14 दिन |
एफएमसी कोराजेन कीटनाशक कैसे इस्तेमाल करें:
ऊपर दी गई फसलवार तालिका के हिसाब से कोराजेन कीटनाशक की जरूरी मात्रा नापें।
पहले थोड़े साफ पानी में दवा डालकर अच्छी तरह हिलाएं, फिर स्प्रे टैंक में डालें।
टैंक में बाकी साफ पानी भरें और छिड़काव से पहले अच्छी तरह मिक्स करें।
हॉलो कोन या फाइन-स्प्रे नोजल इस्तेमाल करें — ध्यान रखें कि स्प्रे फसल की गहराई तक, तने के नीचे और फलों वाले हिस्सों तक पहुंचे जहां बोरर सबसे ज्यादा सक्रिय होते हैं।
कीड़ों की पहली निशानी दिखते ही या अंडे फूटते ही छिड़काव करें ताकि शुरुआती स्टेज में ही अच्छा कंट्रोल मिले।
कोराजेन कीटनाशक की बेहतर स्टेबिलिटी और असर के लिए स्प्रे पानी का pH 6.0 से 7.0 के बीच रखें।
सुबह जल्दी या शाम को छिड़काव करें — मधुमक्खियों के चारा खोजने के पीक समय में छिड़काव न करें।
इस्तेमाल के बाद स्प्रे के सारे उपकरण साफ पानी से अच्छी तरह धोएं।
छिड़काव का सबसे अच्छा समय:
कोराजेन कीटनाशक का छिड़काव सुबह जल्दी या शाम को करें। धान में बोरर के लिए एक्टिव टिलरिंग स्टेज पर स्प्रे करें। कपास में बॉलवर्म के लिए अंडे फूटने की पहली निशानी या शुरुआती लार्वा खाने लगे तब स्प्रे करें। जल्दी छिड़काव करने से सबसे तेज़ कंट्रोल मिलता है और एक छिड़काव का असर सबसे लंबे समय तक बना रहता है।
कितनी बार छिड़काव करें और खेत में दोबारा कब जाएं:
कितनी बार छिड़काव करें: कीड़ों की पहली निशानी दिखते ही छिड़काव करें। अगर कीड़ों का दबाव बना रहे तो 21 दिन बाद दोबारा छिड़काव करें। एक सीजन में 2–3 बार से ज्यादा छिड़काव न करें — 2 बार छिड़काव के बाद रेजिस्टेंस रोकने के लिए अलग IRAC ग्रुप के कीटनाशक से रोटेशन करें।
खेत में दोबारा कब जाएं: छिड़काव के बाद कम से कम 12 घंटे तक बिना सुरक्षा वाले कपड़ों के खेत में न जाएं।
टैंक-मिक्स कम्पैटिबिलिटी: कोराजेन कीटनाशक ज्यादातर फंगीसाइड के साथ मिलाया जा सकता है, जिसमें प्रोपिकोनाज़ोल भी शामिल है। स्प्रे पानी का pH 6.0 से 7.0 के बीच रखें। किसी अनजान प्रोडक्ट के साथ मिलाने से पहले हमेशा जार टेस्ट करें।
नोट: शहतूत के खेतों के पास इस्तेमाल न करें — क्लोरैंट्रानिलिप्रोल रेशम के कीड़ों के लिए बहुत ज्यादा जहरीला है।
सुरक्षा और सावधानियां:
कोराजेन कीटनाशक को छूने या छिड़काव करने से पहले दस्ताने, गॉगल और मास्क जरूर पहनें।
दवा मिलाते या छिड़काव करते समय कुछ खाएं-पिएं नहीं और बीड़ी-सिगरेट न पिएं।
त्वचा और आंखों से सीधा संपर्क न होने दें — अगर दवा लग जाए तो तुरंत 15 मिनट तक साफ पानी से धोएं।
शहतूत के खेतों या रेशम के कीड़े पालने वाली जगहों के पास छिड़काव न करें — यह रेशम के कीड़ों के लिए जहरीला है।
छिड़काव किए हुए खेत से बच्चों, पालतू जानवरों और मवेशियों को कम से कम 12 घंटे तक दूर रखें।
हर छिड़काव के बाद खुली त्वचा को साबुन और पानी से अच्छी तरह धोएं।
खाली बोतल को तीन बार पानी से धोएं, छेद करें और स्थानीय कचरा निपटान नियमों के हिसाब से फेंकें।
दवा को कैसे रखें:
कोराजेन कीटनाशक को उसकी असली सीलबंद बोतल में ठंडी, सूखी और धूप से दूर जगह पर रखें।
खाने-पीने की चीजों, पशु चारे और बीजों से दूर रखें।
बच्चों और पालतू जानवरों की पहुंच से दूर रखें।
रखने का तापमान: 35°C से कम।
शेल्फ लाइफ: बनाने की तारीख से 2 साल।
प्रोडक्ट की जानकारी:
विवरण | जानकारी |
प्रोडक्ट का नाम | एफएमसी कोराजेन कीटनाशक |
ब्रांड | एफएमसी इंडिया प्रा. लि. |
टेक्निकल नाम | क्लोरैंट्रानिलिप्रोल 18.5% SC (सस्पेंशन कॉन्सेंट्रेट) |
केमिकल क्लास | एन्थ्रानिलिक डायमाइड |
IRAC ग्रुप | 28 — रायनोडीन रिसेप्टर एक्टिवेटर |
काम करने का तरीका | सिस्टेमिक + ट्रांसलैमिनर — रायनोडीन रिसेप्टर एक्टिवेशन → लगातार मांसपेशी सिकुड़न → लकवा → मौत |
फॉर्मूलेशन का प्रकार | SC — सस्पेंशन कॉन्सेंट्रेट |
छिड़काव का तरीका | पत्तों पर छिड़काव |
मात्रा | 60–100 मि.ली. प्रति एकड़ (फसल के हिसाब से) |
उपलब्ध पैक साइज | 10 मि.ली., 30 मि.ली., 60 मि.ली., 150 मि.ली., 300 मि.ली. |
बनाने वाला देश | भारत |
शेल्फ लाइफ | बनाने की तारीख से 2 साल |
कटाई से पहले का अंतराल (PHI) | 3–30 दिन (फसल के हिसाब से) |