ग्लाइसेल एक खरतपरवारनाशक है, जिसमें 41% एसएल ग्लाइफोसेट होता है, जो विभिन्न फसलों में घास और अन्य खरपतवारों को नियंत्रित करने के लिए उपयोग किया जाता है। यह जल्दी अवशोषित होता है और विभिन्न प्रकार के खरपतवारों के विरुद्ध अत्यधिक प्रभावी है।
उत्पाद सामग्री: ग्लाइफोसेट 41% एसएल
विशेषताएँ और लाभ:
गैर-फसल क्षेत्रों और चाय बागानों में सबसे अधिक उपयोगी ब्रांड।
इसमें असाधारण स्तनपायी विषाक्तता प्रोफाइल है।
सबसे अधिक उपयोग किया जाने वाला खरतपरवारनाशक है और आधुनिक कृषि का अहम हिस्सा बन चुका है।
कई कृषि विश्वविद्यालयों और संस्थानों द्वारा अनुशंसित।
यह किफायती और उपयोग में आसान है।
उपयोग की मात्रा:
फसल | खरपतवार का नाम | मात्रा / हेक्टेयर (लीटर में) |
चाय | अरुंडिनेला बेंगालेन्सिस, ऐक्सोनोपस कम्प्रसस, सिनोडॉन डैक्टायलोन, इम्पेरेटा सिलेन्ड्रिका, काल्म घास, पासपैलम स्क्रॉबिकुलाटम, पोलिगोनम परफोलियाटम | 2.0 - 3.0 |
गैर-फसल क्षेत्र | सोगहम हेलीपेंस, अन्य द्विबीजपत्री और एकबीजपत्री खरपतवार | 2.0 - 3.0 |
कार्रवाई का तरीका: ग्लाइसेल पौधे में मुख्य रूप से पत्तियों के माध्यम से अवशोषित होता है, लेकिन यह नरम तने के ऊतकों के माध्यम से भी प्रवेश करता है। इसके बाद यह पौधे के सभी हिस्सों में फैल जाता है, जहां यह ऐसे एंजाइम प्रणालियों पर कार्य करता है जो एमिनो एसिड के मेटाबोलिज़्म को रोकते हैं, जिसे शिकीमिक एसिड मार्ग कहा जाता है, जो पौधे की वृद्धि के लिए आवश्यक होता है। इस मार्ग के कारण ग्लाइसेल के प्रभाव से पौधा धीरे-धीरे कुछ दिनों या हफ्तों में मर जाता है, और क्योंकि रासायनिक तत्व पूरे पौधे में फैलता है, कोई भी हिस्सा जीवित नहीं बचता।