धनुका ज़ैपैक एक ब्रॉड-स्पेक्ट्रम, दोहरी कार्रवाई वाली कीटनाशक दवा है। यह सिस्टेमिक और कॉन्टैक्ट दोनों तरीकों से काम करती है। यह दवा कीड़ों के नर्वस सिस्टम में नर्व इम्पल्स को रोकती है और नर्व सेल्स में सोडियम चैनल्स को बिगाड़ देती है। इससे कीड़े सुन्न होकर मर जाते हैं। धनुका ज़ैपैक कीटनाशक कीड़ों को खत्म करने का बेहतरीन उपाय है। यह कई तरह के कीड़ों पर असरदार है और कीड़ों में रेजिस्टेंस बनने से भी रोकती है।
ज़ैपैक कीटनाशक की खास बातें और फायदे:
रेजिस्टेंस मैनेजमेंट: धनुका ज़ैपैक में दो केमिकल का फॉर्मूला है। इससे कीड़ों में दवा के खिलाफ रेजिस्टेंस बनना मुश्किल हो जाता है।
दोहरी सुरक्षा: ज़ैपैक कीटनाशक सिस्टेमिक और कॉन्टैक्ट दोनों तरीकों से काम करती है। इससे फसल को बेहतर सुरक्षा मिलती है और पैदावार बढ़ती है।
लंबे समय तक असर: धनुका ज़ैपैक एक स्प्रे में 14 से 21 दिनों तक सुरक्षा देती है। इससे बार-बार छिड़काव की जरूरत नहीं पड़ती।
ब्रॉड-स्पेक्ट्रम: यह कीटनाशक कई तरह के कीड़ों को कंट्रोल करती है जैसे एफिड्स, थ्रिप्स, बॉलवर्म, शूट फ्लाई और कई अन्य।
वायरस फैलने से रोकती है: धनुका ज़ैपैक कीटनाशक उन कीड़ों को खत्म करती है जो खतरनाक वायरल बीमारियां फैलाते हैं।
ज़ैपैक कीटनाशक के उपयोग — यह किन कीड़ों को कंट्रोल करती है?
ज़ैपैक कीटनाशक रजिस्टर्ड सभी फसलों में रस चूसने वाले और चबाने वाले दोनों तरह के कीड़ों पर काम करती है:
रस चूसने वाले कीड़े: एफिड्स, जैसिड्स, थ्रिप्स, व्हाइटफ्लाई, लीफ हॉपर, टी मॉस्किटो बग
चबाने और छेद करने वाले कीड़े: बॉलवर्म, फ्रूट बोरर, स्टेम बोरर, शूट फ्लाई
कैटरपिलर: सेमीलूपर, लीफ ईटिंग कैटरपिलर, हेयरी कैटरपिलर
बाकी कीड़े: गर्डल बीटल (सोयाबीन), स्टेम फ्लाई (सोयाबीन), ब्राउन प्लांट हॉपर (BPH)
धनुका ज़ैपैक की मात्रा — फसल के हिसाब से मात्रा:
धनुका ज़ैपैक को प्रति एकड़ 150–200 लीटर पानी में मिलाकर पत्तों पर छिड़काव करें। कीड़ों की शुरुआती गतिविधि दिखते ही या इकोनॉमिक थ्रेशोल्ड लेवल पर छिड़काव करें।
ज़ैपैक कीटनाशक की मात्रा प्रति लीटर पानी में करीब 0.4–0.5 मि.ली. है। यह प्रति एकड़ 60–80 मि.ली. के बराबर है।
फसल | कौन से कीड़े | मात्रा प्रति एकड़ | प्रति 15 लीटर पंप | PHI |
कपास | जैसिड्स, एफिड्स, थ्रिप्स, बॉलवर्म | 60–80 मि.ली. | 4.5–6 मि.ली. | 21 दिन |
मक्का | एफिड्स, शूट फ्लाई, स्टेम बोरर | 60–80 मि.ली. | 4.5–6 मि.ली. | 21 दिन |
मूंगफली | लीफ हॉपर, लीफ ईटिंग कैटरपिलर | 60–80 मि.ली. | 4.5–6 मि.ली. | 21 दिन |
सोयाबीन | स्टेम फ्लाई, सेमीलूपर, गर्डल बीटल | 60–80 मि.ली. | 4.5–6 मि.ली. | 21 दिन |
मिर्च | थ्रिप्स, फ्रूट बोरर | 60–80 मि.ली. | 4.5–6 मि.ली. | 7 दिन |
चाय | टी मॉस्किटो बग, थ्रिप्स, सेमीलूपर | 60–80 मि.ली. | 4.5–6 मि.ली. | 5 दिन |
टमाटर | थ्रिप्स, व्हाइटफ्लाई, फ्रूट बोरर | 60–80 मि.ली. | 4.5–6 मि.ली. | 7 दिन |
धनुका ज़ैपैक कीटनाशक कैसे इस्तेमाल करें:
ऊपर दी गई फसल के हिसाब से मात्रा टेबल देखकर ज़ैपैक कीटनाशक की सही मात्रा नापें।
स्प्रे टैंक को आधा साफ पानी से भरें और उसमें नापी हुई दवा डालकर अच्छी तरह मिलाएं।
बाकी बचा पानी भरें और छिड़काव से पहले अच्छी तरह हिलाएं ताकि एक समान घोल बन जाए।
हॉलो कोन या फ्लैट फैन नोजल का इस्तेमाल करें ताकि अच्छी कवरेज मिले। स्प्रे पत्तों की निचली सतह पर जरूर पहुंचे क्योंकि रस चूसने वाले कीड़े वहां सबसे ज्यादा होते हैं।
कीड़ों की शुरुआती गतिविधि दिखते ही या टारगेट कीड़े के इकोनॉमिक थ्रेशोल्ड लेवल पर छिड़काव करें।
फसल में फूल आने के समय छिड़काव न करें — धनुका ज़ैपैक मधुमक्खियों के लिए बहुत ज्यादा जहरीली है।
सुबह जल्दी या शाम को छिड़काव करें — दोपहर की गर्मी और मधुमक्खियों के चारा खोजने के समय छिड़काव न करें।
हर बार इस्तेमाल के बाद स्प्रे के सभी उपकरणों को साफ पानी से अच्छी तरह धोएं।
छिड़काव का सबसे अच्छा समय:
ज़ैपैक कीटनाशक का छिड़काव सुबह जल्दी या शाम को करें। कपास में बॉलवर्म और मिर्च में फ्रूट बोरर के लिए अंडे फूटने या शुरुआती लार्वा दिखते ही छिड़काव करें। रस चूसने वाले कीड़ों के लिए जब कीड़ों की कॉलोनी नई पत्तियों और टहनियों पर पहली बार दिखे तब छिड़काव करें।
कितनी बार छिड़काव करें और खेत में दोबारा कब जाएं:
कितनी बार छिड़काव करें: कीड़ों का हमला दिखते ही पहला छिड़काव करें। अगर कीड़ों का दबाव बना रहे तो हर 10–14 दिन में दोबारा छिड़काव करें। एक सीजन में 2–3 बार से ज्यादा छिड़काव न करें — लगातार 2 बार छिड़काव के बाद अलग IRAC ग्रुप की कीटनाशक दवा बदलकर इस्तेमाल करें ताकि कीड़ों में रेजिस्टेंस न बने।
खेत में दोबारा कब जाएं: छिड़काव के बाद कम से कम 24 घंटे तक बिना सुरक्षा वाले कपड़ों के खेत में न जाएं।
टैंक-मिक्स कम्पैटिबिलिटी: धनुका ज़ैपैक ज्यादातर फंगीसाइड और कीटनाशक दवाओं के साथ मिलाई जा सकती है। तेज क्षारीय (एल्कलाइन) प्रोडक्ट के साथ न मिलाएं। किसी भी अनजान प्रोडक्ट के साथ मिलाने से पहले जार टेस्ट जरूर करें।
सुरक्षा और सावधानियां:
ज़ैपैक कीटनाशक को छूने या छिड़काव करने से पहले दस्ताने, गॉगल और फेस मास्क जरूर पहनें।
दवा मिलाते या छिड़काव करते समय कुछ खाएं-पिएं नहीं और बीड़ी-सिगरेट न पिएं।
दवा को सीधे त्वचा और आंखों से बचाएं — अगर लग जाए तो तुरंत 15 मिनट तक साफ पानी से धोएं।
यह दवा मधुमक्खियों के लिए बहुत ज्यादा जहरीली है — मधुमक्खियों के चारा खोजने के समय, फसल में फूल आने पर या मधुमक्खी के छत्तों के पास छिड़काव न करें।
स्प्रे की फुहार आसपास के फूल वाले खरपतवार, बाड़ या फूल वाली फसलों पर न जाने दें।
बच्चों, पालतू जानवरों और मवेशियों को छिड़काव किए हुए खेत से कम से कम 24 घंटे तक दूर रखें।
हर बार छिड़काव के बाद शरीर के खुले हिस्सों को साबुन और पानी से अच्छी तरह धोएं।
खाली बोतल/डिब्बे को तीन बार पानी से धोएं, छेद करें और स्थानीय कचरा निपटान नियमों के अनुसार फेंकें।
दवा को कैसे रखें:
धनुका ज़ैपैक को उसकी असली सीलबंद बोतल/पैकेट में ठंडी, सूखी जगह पर रखें। सीधी धूप और गर्मी से बचाएं।
खाने-पीने की चीजों, पशु चारे और बीजों से दूर रखें।
बच्चों और पालतू जानवरों की पहुंच से दूर रखें।
रखने का तापमान: 35°C से कम।
शेल्फ लाइफ: बनाने की तारीख से 2 साल।
प्रोडक्ट की जानकारी:
विवरण | जानकारी |
प्रोडक्ट का नाम | धनुका ज़ैपैक कीटनाशक |
ब्रांड | धनुका एग्रीटेक लिमिटेड |
ज़ैपैक कीटनाशक टेक्निकल नाम | थायामेथोक्सम 12.6% + लैम्ब्डा सायहैलोथ्रिन 9.5% ZC (ज़ीऑन कॉन्सन्ट्रेट) |
केमिकल क्लास | नियोनिकोटिनॉइड (थायामेथोक्सम) + पायरेथ्रॉइड (लैम्ब्डा सायहैलोथ्रिन) |
IRAC ग्रुप | 4A (थायामेथोक्सम — nAChR एंटागोनिस्ट) + 3A (लैम्ब्डा सायहैलोथ्रिन — सोडियम चैनल मॉड्यूलेटर) |
काम करने का तरीका | सिस्टेमिक (थायामेथोक्सम — पौधे में घुलकर पूरे पौधे में फैलती है) + कॉन्टैक्ट + स्टमक (लैम्ब्डा सायहैलोथ्रिन — सोडियम चैनल बिगाड़ती है → कीड़ा सुन्न होता है → मर जाता है) |
फॉर्मूलेशन का प्रकार | ZC — ज़ीऑन कॉन्सन्ट्रेट (माइक्रो-एनकैप्सुलेटेड) |
छिड़काव का तरीका | पत्तों पर छिड़काव |
मात्रा | 60–80 मि.ली. प्रति एकड़ (0.4–0.5 मि.ली. प्रति लीटर पानी) |
पैक साइज मौजूद | 200 मि.ली., 500 मि.ली. |
बनाने वाला देश | भारत |
शेल्फ लाइफ | बनाने की तारीख से 2 साल |
कटाई से पहले का अंतराल (PHI) | 5–21 दिन (फसल के हिसाब से) |