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| Brand: | महिंद्रा समिट |
| Product Code: | 10879 |
| उद्गम देश: | India |
| Category: | Crop Protection |
| Sub Category: | Fungicides |

महिंद्रा तरार एक ब्रॉड-स्पेक्ट्रम सिस्टेमिक फंगीसाइड है, जिसे महिंद्रा समिट एग्री साइंसेज ने बनाया है। यह खास तौर पर मिर्च, प्याज और धान की फसलों के लिए तैयार किया गया है, जहां फफूंद रोगों से पैदावार और क्वालिटी में भारी नुकसान हो सकता है। यह फफूंद के बीजाणुओं को इन्फेक्शन शुरू होने से पहले ही अंकुरित होने से रोकता है और पौधे के अंदर पहले से फैले इन्फेक्शन को भी खत्म करता है। महिंद्रा तरार फंगीसाइड धान में फ्लैग लीफ (सबसे ऊपर वाली पत्ती) को बीमारी से बचाकर हेल्दी रखता है, जिससे दाने पूरी तरह भरते हैं और कटाई पर दाने का साइज बेहतर मिलता है। इसका स्प्रे विंडो काफी चौड़ा है — किसानों को छिड़काव के टाइमिंग में लचीलापन मिलता है और जरूरी ट्रीटमेंट पीरियड छूटता नहीं।
फ्लैग लीफ प्रोटेक्शन: तरार धान के पौधे की सबसे ऊपर वाली पत्ती को हेल्दी और बीमारी-मुक्त रखता है, जिससे फसल को दाने पूरी तरह भरने और कटाई पर बेहतर दाना वजन के लिए पूरी एनर्जी मिलती है।
एंटी-स्पोरुलेंट एक्शन: महिंद्रा तरार फंगीसाइड बीजाणुओं के अंकुरण को रोकता है और बीमारी को हेल्दी पौधों के हिस्सों और आसपास के पौधों में फैलने से रोकता है।
ग्रीनिंग इफेक्ट: यह पत्तों को ज्यादा समय तक हरा और प्रोडक्टिव बनाए रखता है — छिड़काव की गई फसल में फोटोसिंथेसिस बेहतर होता है और ग्रोथ मजबूत रहती है।
एक समान फूल आना: महिंद्रा तरार फंगीसाइड फसल की पत्तियों को रिप्रोडक्टिव स्टेज में बीमारी-मुक्त रखकर एक समान और हेल्दी फ्लावरिंग को बढ़ावा देता है।
रेजिस्टेंस मैनेजमेंट: दो अलग-अलग केमिकल ग्रुप के एक्टिव इंग्रेडिएंट फफूंद पर दो अलग-अलग जगह अटैक करते हैं, जिससे समय के साथ रेजिस्टेंस बनने का खतरा कम हो जाता है।
कई फसलों में असरदार: महिंद्रा तरार फंगीसाइड मिर्च, प्याज और धान के लिए रजिस्टर्ड है — गेहूं, टमाटर, आलू और दूसरी खेत और सब्जी की फसलों में भी असरदार है।
ब्लाइट: धान में शीथ ब्लाइट, अर्ली ब्लाइट, लेट ब्लाइट
पत्तों के रोग: लीफ स्पॉट, प्याज में पर्पल ब्लॉच, लीफ ब्लाइट
मिल्ड्यू: पाउडरी मिल्ड्यू, डाउनी मिल्ड्यू
दूसरे रोग: फ्रूट रॉट, डाईबैक, रस्ट, एन्थ्रेक्नोज
महिंद्रा तरार फंगीसाइड को पत्तों पर छिड़काव के लिए 200 लीटर पानी प्रति एकड़ में मिलाएं। बीमारी की पहली निशानी दिखते ही या फसल की कमजोर स्टेज में बचाव के तौर पर स्प्रे करें ताकि अच्छे नतीजे मिलें।
फसल | टारगेट रोग | मात्रा / प्रति एकड़ | 15 लीटर पंप में | PHI |
|---|---|---|---|---|
धान | शीथ ब्लाइट | 250–300 मि.ली. | 19–22 मि.ली. | 28 दिन |
मिर्च | फ्रूट रॉट, डाईबैक, पाउडरी मिल्ड्यू | 250–300 मि.ली. | 19–22 मि.ली. | 7 दिन |
प्याज | पर्पल ब्लॉच, लीफ ब्लाइट | 250–300 मि.ली. | 19–22 मि.ली. | 7 दिन |
गेहूं | येलो रस्ट, लीफ रस्ट | 250–300 मि.ली. | 19–22 मि.ली. | 28 दिन |
टमाटर | अर्ली ब्लाइट, लेट ब्लाइट, लीफ स्पॉट | 250–300 मि.ली. | 19–22 मि.ली. | 5 दिन |
आलू | अर्ली ब्लाइट, लेट ब्लाइट | 250–300 मि.ली. | 19–22 मि.ली. | 14 दिन |
नोट: बताई गई मात्रा से ज्यादा कभी इस्तेमाल न करें।
मात्रा नापने से पहले महिंद्रा तरार फंगीसाइड की बोतल को अच्छी तरह हिलाएं।
जरूरी मात्रा ध्यान से नापें और स्प्रेयर टैंक में करीब एक-तिहाई पानी भरकर उसमें डालें।
बाकी साफ पानी डालते हुए लगातार हिलाते रहें जब तक घोल पूरी तरह एक समान न हो जाए।
पूरी फसल की कैनोपी पर बराबर से छिड़काव करें और पत्तों की ऊपरी और निचली दोनों सतहों को अच्छी तरह कवर करें।
धान में स्प्रे फ्लैग लीफ और निचली शीथ तक पहुंचे, यह पक्का करें क्योंकि शीथ ब्लाइट का इन्फेक्शन वहीं से शुरू होता है।
प्याज में सभी पत्तों की सतहों पर अच्छी तरह कवरेज दें क्योंकि पर्पल ब्लॉच सबसे पहले वहीं दिखता है।
हर बार इस्तेमाल के बाद स्प्रेयर को साफ पानी से धोएं।
महिंद्रा तरार फंगीसाइड का छिड़काव सुबह जल्दी या शाम को करें जब तापमान ठंडा हो और हवा की रफ्तार कम हो — बीमारी दिखने से पहले बचाव के तौर पर स्प्रे करें, खासकर गर्म और नमी वाले मौसम में जब फफूंद सबसे तेजी से फैलती है।
कितनी बार छिड़काव करें: महिंद्रा तरार फंगीसाइड का छिड़काव बीमारी की पहली निशानी दिखते ही करें। अगर बीमारी का दबाव बना रहे तो 14 से 15 दिन बाद दोबारा स्प्रे करें। एक सीजन में 2 से 3 बार से ज्यादा स्प्रे न करें।
खेत में दोबारा कब जाएं: छिड़काव के बाद कम से कम 24 घंटे तक बिना सुरक्षा वाले कपड़ों के छिड़काव किए हुए खेत में न जाएं।
टैंक-मिक्स कम्पैटिबिलिटी: ज्यादातर आम इस्तेमाल होने वाले कीटनाशकों और फंगीसाइड के साथ मिला सकते हैं। मिलाने से पहले हमेशा जार टेस्ट करें। तेज क्षारीय (एल्कलाइन) प्रोडक्ट के साथ न मिलाएं।
दवा नापने या छूने से पहले हमेशा दस्ताने, सेफ्टी गॉगल और मास्क पहनें।
दवा मिलाते या छिड़काव करते समय कभी खाना न खाएं, पानी न पिएं और बीड़ी-सिगरेट न पिएं।
काम खत्म होने के बाद खुली त्वचा और हाथों को साबुन और पानी से अच्छी तरह धोएं।
बच्चों, पालतू जानवरों और मवेशियों को छिड़काव किए हुए खेत से कम से कम 24 घंटे तक दूर रखें।
तालाब, नदी या मछली पालन वाली जगह के पास छिड़काव न करें।
खाली कंटेनर को तीन बार साफ पानी से धोएं, छेद करें और स्थानीय कचरा नियमों के हिसाब से निपटान करें।
महिंद्रा तरार फंगीसाइड को ओरिजिनल सीलबंद कंटेनर में ठंडी, सूखी और हवादार जगह पर रखें, सीधी धूप और गर्मी से दूर।
खाने-पीने की चीजों, पशु चारे, पीने के पानी या बीजों के पास कभी न रखें।
बच्चों और पालतू जानवरों की पहुंच से पूरी तरह दूर रखें।
रखने का तापमान: 35°C से कम
शेल्फ लाइफ: बनाने की तारीख से 2 साल।
विवरण | जानकारी |
|---|---|
प्रोडक्ट का नाम | महिंद्रा तरार फंगीसाइड |
टेक्निकल नाम | एज़ोक्सिस्ट्रोबिन 11% + टेबुकोनाज़ोल 18.3% SC |
फॉर्मूलेशन का प्रकार | सस्पेंशन कॉन्संट्रेट (SC) |
केमिकल ग्रुप | स्ट्रोबिल्यूरिन + ट्राइएज़ोल |
काम करने का तरीका | सिस्टेमिक प्रिवेंटिव + क्यूरेटिव + एंटी-स्पोरुलेंट फंगीसाइड |
FRAC ग्रुप | C3 + G1 (ग्रुप 11 + ग्रुप 3) |
ब्रांड | महिंद्रा समिट एग्री साइंसेज |
किन फसलों के लिए | मिर्च, प्याज, धान — गेहूं, टमाटर और आलू में भी असरदार |
पैक साइज मौजूद | 100 मि.ली., 250 मि.ली., 500 मि.ली., 1 लीटर |
बनाने वाला देश | भारत |
शेल्फ लाइफ | बनाने की तारीख से 2 साल |
कटाई से पहले का अंतराल | 5–28 दिन (फसल के हिसाब से) |
यह धान में शीथ ब्लाइट, मिर्च में फ्रूट रॉट और डाईबैक, प्याज में पर्पल ब्लॉच, गेहूं में रस्ट, और टमाटर और आलू में अर्ली और लेट ब्लाइट को सिस्टेमिक प्रिवेंटिव और क्यूरेटिव एक्शन से कंट्रोल करता है।
फ्लैग लीफ धान के पौधे की सबसे ऊपर वाली पत्ती होती है और यह बाली में बन रहे दाने को एनर्जी देने के लिए सीधे जिम्मेदार होती है। तरार के छिड़काव से फ्लैग लीफ को हेल्दी और बीमारी-मुक्त रखने पर दाने पूरी तरह भरते हैं, दाने का साइज बेहतर होता है और कटाई पर कुल पैदावार बढ़ती है।
तरार फंगीसाइड बीजाणुओं के अंकुरण को रोकता है और फफूंद को नए बीजाणु बनाने और हेल्दी पौधों के हिस्सों और आसपास के पौधों पर छोड़ने से रोकता है — इन्फेक्शन शुरू हो जाने के बाद भी बीमारी को आगे फैलने से रोकता है।
दोनों — तरार फंगीसाइड को बीमारी दिखने से पहले बचाव के तौर पर प्रोटेक्टिव स्प्रे के रूप में लगा सकते हैं, और इन्फेक्शन शुरू होने के बाद क्यूरेटिव के तौर पर भी। इसका चौड़ा स्प्रे विंडो किसानों को छिड़काव के टाइमिंग में लचीलापन देता है और जरूरी ट्रीटमेंट पीरियड नहीं छूटता।
सुबह जल्दी या शाम को जब तापमान ठंडा हो — बीमारी दिखने से पहले बचाव के तौर पर स्प्रे करें, खासकर गर्म और नमी वाले मौसम में जब शीथ ब्लाइट, पर्पल ब्लॉच और फ्रूट रॉट सबसे तेजी से फैलते हैं।
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