लाल चंदन जिसे भारत में लाल चंदन या रक्त चंदन के नाम से जाना जाता है, इसकी व्यापक उपयोगिता और औषधीय गुणों के कारण बाजार में इसकी मांग है।
वैज्ञानिक नाम: टेरोकार्पस सेंटालिनस
आकार: 10 से 30 मीटर ऊंचा
रंग: गहरा लाल
आयु: 10 से 15 साल तक बढ़ने में समय लगता है, लेकिन अंकुरण 15 से 45 दिनों में हो सकता है।
मूल: भारत
लाल चंदन के बीज सस्ते होते हैं और इसके लिए संतुलित तापमान, पानी और धूप की आवश्यकता होती है। यह औषधीय उपयोग में भी बहुत महत्वपूर्ण है और इसका उपयोग लकड़ी, औषधि, और विभिन्न उत्पादों में किया जाता है।
बीज विशेषताएँ:
बीजों का नाम: लाल चंदन के बीज
अन्य सामान्य नाम: लाल चंदन के बीज, रेड सैंडर्स बीज, रुबीवुड बीज, सैंटल रोज़ बीज
अंकुरण का समय: 15 से 40 दिन या अधिक
उत्पादन का समय: फरवरी से मई
औसत ऊंचाई: 10 से 30 मीटर
रंग: गहरा लाल
विशेषताएँ और उपयोग:
बीज की आवश्यकताएँ:
लाल चंदन के बीज से पौधा कैसे उगाएं?:
लाल चंदन के बीजों को 24 घंटे पानी में भिगोकर धूप में सूखने दें।
उर्वर मिट्टी तैयार करें और उसमें लाल मिट्टी, बालू और खाद मिलाएं।
बीजों को 10 से 15 फीट की दूरी पर बोएं।
पानी और जैविक खाद डालें ताकि पौधों की वृद्धि बेहतर हो।
बीज अंकुरित होने में 15 से 40 दिन लग सकते हैं, और यह पौधा 10 से 15 साल में पूरी तरह से विकसित होगा।
ध्यान दें: चंदन के पौधों के लिए सहायक पेड़ लगाए जाएं जो उनके परजीवी जड़ तंत्र का समर्थन करें, जैसे रास्पबेरी जाम, रॉक शीओक, और मुल्गा पेड़।