सुपर नैपियर घास एक उच्च उपज देने वाली चारा फसल है, जो अपने स्वाद और पोषण के लिए प्रसिद्ध है। यह घास युवा अवस्था में बहुत पौष्टिक होती है और इसकी गहरे हरे रंग की पत्तियाँ होती हैं। रोपाई के 75 से 80 दिनों के बाद, इसकी ऊँचाई 7 से 8 फीट तक पहुँच जाती है। इसे खेतों के किनारों पर या कंटूर लाइनों पर लगाकर कटाव को नियंत्रित करने में मदद मिलती है। इसे फली फसलों और चारा पेड़ों के साथ अंतर फसल के रूप में या अकेले भी उगाया जा सकता है।
लाभ:
सुपर नैपियर घास को "नैपियर घास का राजा" कहा जाता है। दूध उत्पादन करने वाले किसान इससे काफी पैसे बचा सकते हैं। यह विभिन्न प्रकार की मिट्टियों में आसानी से उगाई जा सकती है और यह सभी प्रकार के पशुओं जैसे बकरी, गाय, भेड़ और खरगोश के लिए चारा है। इसे वर्ष में 8 बार तक काटा जा सकता है, और यह कम उर्वरता वाली और कम पानी वाली भूमि पर भी अच्छी पैदावार देती है, जो 400-450 टन प्रति हेक्टेयर हो सकती है। इसे पूरे वर्ष सिंचाई की स्थिति में उगाया जा सकता है। इसकी गुणवत्ता उच्च होती है, जिसमें कैल्शियम, मैग्नीशियम और फास्फोरस की मात्रा अधिक होती है और ऑक्सलेट की मात्रा बहुत कम होती है।
विशेषताएँ:
रंग: आकर्षक हरा
ऊँचाई: 7-8 फीट
पहली कटाई के दिन: 75-80 दिन
काटने की संख्या: भूमि के अनुसार साल में 8 बार
प्रोटीन की मात्रा: उच्च प्रोटीन चारा
सिंचाई विधि: सीधे मुख्य खेत में बुवाई
श्रेणी: चारा बीज
बीज दर: 9-10 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर (भारतीय कृषि प्रथाओं के अनुसार)
स्पेसिंग: 1 x 1 फीट (हमारे अनुसंधान और विकास डेटा के अनुसार)
बीज संख्या: लगभग 70-80 प्रति ग्राम
अनुकूल क्षेत्र/मौसम: पूरे वर्ष