सागवान एक उष्णकटिबंधीय कठोर लकड़ी का पौधा है, जिसे इसकी मजबूती और जल प्रतिरोध के लिए मूल्यवान माना जाता है। इसका उपयोग नाव निर्माण, बाहरी निर्माण, फर्नीचर, नक़्क़ाशी आदि में किया जाता है।
वैज्ञानिक नाम: टेक्टोना ग्रैंडिस
आकार: गोलाकार
आयाम: 0.4-0.6 सेंटीमीटर व्यास
रंग: भूरा
आयु: एक साल से अधिक, अंकुरण के लिए अच्छा
मूल: भारत
यह पौधा लैमीसी कुल में आता है और यह एक बड़ा, पत्तेदार पेड़ है जो मिश्रित हार्डवुड जंगलों में प्रचलित है। इसके छोटे, सुगंधित सफेद फूल और कागजी पत्ते होते हैं, जो निचली सतह पर अक्सर बालों वाले होते हैं। ताजे कटे सागवान की लकड़ी में चमड़े जैसी खुशबू होती है।
सागवान की लकड़ी की विशेषता उसकी मजबूती और जल प्रतिरोध है, जिससे यह नाव निर्माण, बाहरी निर्माण, विनीयर, फर्नीचर, नक़्क़ाशी, टर्निंग और अन्य छोटे लकड़ी के कामों में उपयोगी है।
अंकुरण दर: 85 से 90%
बीजों की संख्या: पैकेट में लगभग 500 से 600 बीज
अंकुरण अवधि: 15 से 20 दिन
उपयोग: सागवान की लकड़ी का उपयोग नाव निर्माण, बाहरी निर्माण, फर्नीचर, नक़्क़ाशी आदि में होता है
बीज दर: 5 से 6 किलो / एकड़