











| Brand: | श्री साईं फॉरेस्ट्री |
| Product Code: | 3271 |
| Country of Origin: | India |
| Category: | Seeds |
| Sub Category: | Desi Seeds |
| Sub Sub Category: | Shisham Tree |
शिशम एक मध्यम से बड़े आकार का पर्णपाती पेड़ है जिसे विभिन्न नामों से जाना जाता है, जैसे भारतीय गुलाबवुड और शिषू पेड़। इस पेड़ का उपयोग मुख्य रूप से घर के फर्नीचर, लकड़ी की कला, नक्काशी, प्लाइवुड और बहुत कुछ बनाने में किया जाता है।
इसके अलावा, शिशम या शिषू पेड़ की पत्तियाँ, तेल और अन्य भाग भी लाभकारी औषधीय गुणों से भरपूर होते हैं। सामान्यत: बीजों को अंकुरित होने में 10 से 15 दिन का समय लगता है। हालांकि, इस पेड़ को पूरी तरह से बढ़ने में लगभग 15 से 20 साल लगते हैं। आप हमारे स्टोर से शिशम पेड़ के बीज ऑनलाइन खरीद सकते हैं और इस लाभकारी पेड़ को अपने घर के बग़ीचे, कृषि क्षेत्र या फार्म हाउस में लगा सकते हैं।
वनस्पति नाम: डालबर्जिया सिस्सू
बीज विशेषताएँ
विशेषताएँ | विवरण |
नाम | शिशम पेड़ के बीज |
अन्य सामान्य नाम | भारतीय गुलाबवुड, शिषू पेड़, जग पेड़ के बीज, ताहिल पेड़ के बीज |
अंकुरण समय | 1 से 2 सप्ताह |
कटाई का मौसम | नवम्बर से जुलाई |
औसत ऊँचाई | 25 मीटर (82 फीट) |
रंग | गहरा हरा |
विशेषताएँ और लाभ:
शिशम पेड़ से फर्नीचर, लकड़ी की कला, और प्लाइवुड बनते हैं।
यह मिट्टी का कटाव कम करता है और मिट्टी की गुणवत्ता को बढ़ाने में मदद करता है।
यह दीमक से भी प्रतिरोधी है।
यह विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं के इलाज में आदर्श पेड़ है।
इसका उपयोग जलन, गोनोरिया और अन्य बीमारियों के इलाज के लिए किया जाता है।
शिशम तेल में एंटी-फंगल तत्व होते हैं, जो त्वचा की बीमारियों से लड़ने में मदद कर सकते हैं।
बीज की आवश्यकताएँ
आवश्यकताएँ | विवरण |
मौसम | फरवरी |
मिट्टी | अच्छी तरह से जल निकासी वाली, रेतीली या दोमट मिट्टी |
सूरज की रोशनी | 6 से 8 घंटे की सीधी धूप |
तापमान | 10 से 40°C |
पानी | नियमित पानी की आवश्यकता |
उर्वरक | जैविक और एनपीके उर्वरक की आवश्यकता |
शिशम पेड़ के बीज कैसे बोएं?
शिशम पेड़ के बीजों को 24 घंटे तक पानी में भिगोएं।
अच्छी जल निकासी वाली, नम मिट्टी तैयार करें और उसमें रेत और जैविक खाद का मिश्रण डालें।
अब बीजों को मिट्टी में बोएं और ऊपर से रेत और खाद से ढक दें।
पानी का छिड़काव करें और दिन में दो बार पानी डालें।
सुनिश्चित करें कि बीजों को पूरे दिन पर्याप्त धूप मिले।
फसल को बचाने के लिए प्रमाणित कीटनाशक, कवकनाशक और अन्य फसल सुरक्षा उपायों का उपयोग करें।
पौधे की देखभाल के टिप्स:
पत्तियों पर सीधे पानी न डालें।
पानी का ठहराव न होने दें, ताकि फसल को नुकसान न हो।
सुनिश्चित करें कि फसलों को प्रमाणित और गैर-विषाक्त रसायन मिलें।
खरपतवार और अवांछित घास की वृद्धि को रोकने के लिए मल्चिंग पेपर का उपयोग करें।
मिट्टी की उर्वरता और फसल की सेहत को बढ़ाने के लिए सर्वोत्तम गुणवत्ता का उर्वरक, जैविक पदार्थ, गोबर की खाद, और एनपीके उर्वरक डालें।
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