अकासिया नीलोटिका (बबूल) एक बहुपरकारी पेड़ है, जो लकड़ी, ईंधन, छांव, खाद्य, चारा, शहद, रंग, गोंद और बाड़ लगाने के लिए उपयोगी होता है।
पर्यावरणीय प्रभाव: यह मिट्टी सुधारने और पुनः उत्थान में सहायक है। अकासिया नीलोटिका एक नाइट्रोजन-फिक्सिंग legume है, जिसे घास या अनाज फसलों के साथ उगाया जा सकता है ताकि उनके नाइट्रोजन मान को बढ़ाया जा सके। इसका उपयोग खनन क्षेत्रों और अन्य क्षय और कटाव वाले क्षेत्रों में, जैसे कि भारत के चंबल घाटियों में, पुनः वनस्पति के लिए किया जाता है।
चारा प्रबंधन: इस पेड़ को मवेशियों द्वारा खाया जाता है या इसे चारे के रूप में काटा जाता है। इसकी फलियाँ ज़मीन पर गिरी हुई या मवेशियों द्वारा खाई जाती हैं, या खेतों में इकट्ठी की जाती हैं। चारा प्रबंधन के लिए अकासिया नीलोटिका का उपयोग विभिन्न समयों में और विभिन्न प्रकार के जानवरों के लिए किया जाता है।
बीज अंकुरण प्रतिशत: 80 से 90%
अंकुरण अवधि: 7 से 30 दिन
प्रारंभिक उपचार: बीजों को ठंडे पानी में 48 घंटे के लिए भिगो सकते हैं; या उन्हें 80°C गर्म पानी में डालकर ठंडा होने तक भिगो सकते हैं; या 2 से 3 दिन के लिए गीली गोबर की ढेर में रखा जा सकता है; या सांद्र H2SO2 (सल्फ्यूरिक एसिड) में 10 से 14 मिनट के लिए डुबो सकते हैं। उपचारित बीजों को तुरंत बोना चाहिए।
नर्सरी तकनीक: बीजों को 1.5 सेंटीमीटर गहरा पोलिथीन बैग में बोकर पौधों को उगाया जाता है। दो महीने बाद अतिरिक्त पानी से बचना चाहिए। पौधों को छांव दी जाती है ताकि सतह में दरारें न आएं।