माइक्रोला आरसीएफ उर्वरक
माइक्रोला आरसीएफ एक तरल सूक्ष्म पोषक तत्व उर्वरक है जो फसलों की गुणवत्ता और उपज में सुधार करने के लिए उपयोग किया जाता है। यह छह आवश्यक सूक्ष्म पोषक तत्वों का मिश्रण है:
जिंक, आयरन, तांबा, बोरोन, मैंगनीज, और मोलिब्डेनम।
ये सूक्ष्म पोषक तत्व पौधों के विकास और वृद्धि के लिए आवश्यक होते हैं, और अक्सर लगातार फसल उत्पादन के कारण मिट्टी में इनकी कमी हो जाती है।
माइक्रोला आरसीएफ उर्वरक को पत्तियों पर छिड़काव के रूप में लागू किया जाता है और यह पत्तियों द्वारा जल्दी अवशोषित हो जाता है। यह पत्तियों में क्लोरोफिल की मात्रा को बढ़ाता है, जिससे फोटोसिंथेसिस और पौधों की वृद्धि में वृद्धि होती है। यह पौधों की कीटों और रोगों के प्रति सहनशीलता को भी बढ़ाता है।
यह उर्वरक गेहूं, धान, मक्का, कपास, सब्जियां, और फल जैसी विभिन्न फसलों के लिए उपयुक्त है। यह जैविक फसलों पर भी सुरक्षित है।
माइक्रोला आरसीएफ उर्वरक के उपयोग के लाभ:
फसलों की गुणवत्ता और उपज में सुधार करता है।
पौधों की कीटों और रोगों के प्रति सहनशीलता बढ़ाता है।
पत्तियों में क्लोरोफिल की मात्रा में सुधार करता है, जिससे फोटोसिंथेसिस और पौधों की वृद्धि बढ़ती है।
जैविक फसलों के लिए सुरक्षित।
उपयोग की मात्रा और आवेदन:
माइक्रोला आरसीएफ उर्वरक को पत्तियों पर छिड़काव के रूप में लागू किया जाता है। अनुशंसित मात्रा 1-2 मि.ली. प्रति लीटर पानी है। छिड़काव पत्तियों पर किया जाना चाहिए, जिससे ऊपर और नीचे दोनों सतहों को कवर किया जा सके। इसे फसल की किसी भी अवस्था में लागू किया जा सकता है, लेकिन यह सबसे प्रभावी होता है जब इसे पौधों की वृद्धि और फूल आने की अवस्था में लागू किया जाता है।
फसलों के लिए मात्रा:
गेहूं: 1-2 मि.ली. प्रति लीटर पानी, प्रत्येक मौसम में दो बार, पहले 30-35 दिन (बीज बोने के बाद) और फिर 60-65 दिन (बीज बोने के बाद)।
धान: 1-2 मि.ली. प्रति लीटर पानी, एक बार 45-50 दिन (बीज बोने के बाद) में।
मक्का: 1-2 मि.ली. प्रति लीटर पानी, प्रत्येक मौसम में दो बार, पहले 25-30 दिन (बीज बोने के बाद) और फिर 50-55 दिन (बीज बोने के बाद)।
कपास: 1-2 मि.ली. प्रति लीटर पानी, प्रत्येक मौसम में दो बार, पहले 30-35 दिन (बीज बोने के बाद) और फिर 60-65 दिन (बीज बोने के बाद)।
सब्जियां: 1-2 मि.ली. प्रति लीटर पानी, एक या दो बार मौसम के दौरान, फसल के अनुसार।
फल: 1-2 मि.ली. प्रति लीटर पानी, एक या दो बार मौसम के दौरान, फसल के अनुसार।