











| Brand: | श्री साईं फॉरेस्ट्री |
| Product Code: | 3350 |
| Country of Origin: | India |
| Category: | Seeds |
| Sub Category: | Desi Seeds |
| Sub Sub Category: | Karanj |
करंजा पेड़ एक तेज़ी से बढ़ने वाला पर्णपाती पेड़ है जो 20 मीटर तक ऊँचा हो सकता है। इसे भारत में उत्पन्न होने का अनुमान है और यह पूरे एशिया में पाया जाता है। यह पेड़ लगभग 15 से 25 मीटर ऊँचा बढ़ता है और इसका बड़ा छत्र समान रूप से फैलता है।
पत्तियाँ गर्मी के शुरू में मुलायम, चमकदार और बरगंडी रंग की होती हैं और मौसम के साथ यह गहरे हरे रंग में बदल जाती हैं। सफेद, बैंगनी और गुलाबी फूलों के छोटे गुच्छे पूरे वर्ष उनके शाखाओं पर खिलते हैं और फिर भूरे रंग के बीज फली में बदल जाते हैं।
यह पेड़ तीव्र गर्मी और धूप के लिए उपयुक्त है, और इसकी घनी जड़ें और लंबी तनी जड़ इसे सूखा सहनशील बनाती हैं। फूलने का समय: मार्च-अप्रैल।
विज्ञानिक नाम: मिलेटिया पिनाटा
बीज विशेषताएँ
विशेषताएँ | विवरण |
ब्रांड | श्री साई फॉरेस्ट्री |
नाम | करंजा बीज |
अन्य सामान्य नाम | मिलेटिया पिनाटा बीज, भारतीय बीच पेड़ बीज, पोंगामिया पिनाटा |
अंकुरण समय | 10 से 60 दिन |
फूलने का समय | 3 से 4 साल |
औसत पेड़ की ऊँचाई | 15 से 30 मीटर |
औसत वजन | 2 से 3 ग्राम |
उपयोग और लाभ:
करंजा तेल त्वचा विकारों जैसे फुंसी, घाव और एक्जिमा को नियंत्रित करता है।
यह अल्सर और गठिया को ठीक करने में मदद करता है।
सूजन और जोड़ो के दर्द को कम करने में उपयोगी है।
यह तेल घावों को ठीक करने के लिए भी इस्तेमाल किया जा सकता है।
मांसपेशियों के दर्द से राहत पाने के लिए भी करंजा तेल का उपयोग किया जा सकता है।
पोषक तत्व: करंजा बीजों में क्रूड फाइबर, राख, नमी, तेल, और प्रोटीन जैसे विभिन्न घटक होते हैं।
बीज की आवश्यकताएँ
आवश्यकताएँ | विवरण |
बोने का समय | अप्रैल से अगस्त |
मिट्टी | अच्छी जल निकासी वाली, रेतीली और दोमट मिट्टी |
सूरज की रोशनी | पूर्ण सूर्य प्रकाश में बढ़ता है |
तापमान | 18 से 25°C |
पानी | नियमित पानी की आवश्यकता |
उर्वरक | जैविक खाद और एनपीके उर्वरक |
करंजा बीज कैसे बोएं?
करंजा बीजों को 24 घंटे के लिए पानी में भिगोएं।
मिट्टी की उर्वरक क्षमता बढ़ाने के लिए गाय का गोबर और जैविक खाद डालें।
बीजों को गमलों या सीधे मिट्टी में बोएं।
मिट्टी में पानी डालें और सुनिश्चित करें कि बीज को पूरी धूप मिले।
बीज कुछ हफ्तों में अंकुरित हो जाएंगे।
अब आप पौधों को मिट्टी में प्रत्यारोपित कर सकते हैं और फसल के नुकसान को रोकने के लिए उपचार करें।
करंजा पेड़ को फल देने में लगभग 3 से 4 साल का समय लगता है।
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