
जिप्सम उर्वरक का एक पारंपरिक और प्रभावी रूप है, जिसका उपयोग कृषि में 250 वर्षों से किया जा रहा है। जिप्सम कैल्शियम और सल्फर का एक अच्छा स्रोत है, जो पौधों की वृद्धि में सुधार कर सकता है। जिप्सम के उपयोग से मिट्टी की शारीरिक और रासायनिक गुण भी सुधार सकते हैं, जिससे मिट्टी का कटाव कम होता है और सतही पानी में पोषक तत्वों (विशेष रूप से फास्फोरस) की मात्रा भी घटती है।
जिप्सम के फायदे:
मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार: जिप्सम मिट्टी के शारीरिक गुणों को सुधारने में मदद करता है, खासकर भारी चिकनी मिट्टी में। इससे मिट्टी के कण एक साथ जुड़ते हैं और मिट्टी को ढीला बनाता है।
मिट्टी के कणों को अलग होने से रोकता है: यह मिट्टी के कणों को एकजुट रखने में मदद करता है, जिससे मिट्टी में दरारें और उबटन की समस्या कम होती है।
बीजों के अंकुरण में मदद करता है: जिप्सम बीजों के अंकुरण को बढ़ावा देता है और पानी को मिट्टी में अच्छे से समाहित होने में मदद करता है।
पानी अवशोषण दर में वृद्धि: इससे पानी की अवशोषण दर बढ़ती है और पानी मिट्टी में सही तरीके से फैलता है।
मिट्टी और पोषक तत्वों के कटाव को कम करता है: जिप्सम मिट्टी के कटाव को कम करता है और सतही पानी में घुलनशील फास्फोरस की मात्रा घटाता है।
अल्यूमीनियम विषाक्तता और मिट्टी की अम्लता को कम करता है: यह मिट्टी में गहरी जड़ें विकसित करने में मदद करता है और पौधों को सूखा पड़ने पर भी पानी और पोषक तत्व आसानी से उपलब्ध होते हैं।
उपयोग: जिप्सम का सबसे अधिक उपयोग सोडिक मिट्टी को सुधारने के लिए किया जाता है और इसे नर्सरी, ग्रीनहाउस, और बागवानी में भी शामिल किया जा सकता है।
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